हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, निम्नलिखित रिवायत “मीज़ानुल हिकमत” नामक किताब से ली गई है। इस रिवायत का पाठ इस प्रकार हैः
رسول خدا صلیاللهعلیهوآله:
إِذَا مَاتَ الإِنسَانُ انْقَطَعَ عَمَلُهُ إِلَّا مِنْ ثَلَاثٍ: إِلَّا بِصَدَقَةٍ جَارِیَةٍ، أَوْ عِلْمٍ یُنْتَفَعُ بِهِ، أَوْ وَلَدٍ صَالِحٍ یَدْعُو لَهُ.
रसूले ख़ुदा (स)ने फ़रमाया:
“जब इंसान की मृत्यु हो जाती है तो उसके कर्मों का सिलसिला समाप्त हो जाता है, सिवाय तीन चीजों के: सदक़ा-ए-जारीया, ऐसा ज्ञान जिससे लोग लाभ उठाएं और नेक संतान जो उसके लिए दुआ करे।”
मीज़ानुल हिकमत, हदीस संख्या 14287
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